upsc civil engineering optional syllabus latest

परिचय(Introduction) :

क्या आप एक माननीय स्थान की ओर अग्रसर होने वाले सिविल इंजीनियर हैं जो सिविल सेवाओं में स्थान हासिल करना चाहते हैं? UPSC परीक्षा के लिए अपना वैकल्पिक विषय सिविल इंजीनियरिंग चुनना एक योजनात्मक कदम हो सकता है, जो आपकी शैक्षिक विशेषज्ञता को आपके करियर लक्ष्यों से मेल खाता है। चलो, upsc civil engineering optional syllabus के महत्वपूर्ण पहलुओं का पता लगाते हैं और देखते हैं कि यह आपके लिए सही क्यों हो सकता है।

upsc civil engineering optional syllabus को अपने वैकल्पिक विषय के रूप में क्यों चुनें?

  1. शैक्षिक पृष्ठभूमि: अगर आपके पास सिविल इंजीनियरिंग का परिचय है, तो इसे वैकल्पिक विषय के रूप में चुनने से आप अपनी शैक्षिक विशेषज्ञता का लाभ उठा सकते हैं, जिससे आपकी तैयारी अधिक फोकस और उच्च स्तर पर हो सकती है।

  2. समस्याओं के समाधान कौशल: इस विषय में विशेषज्ञता होने से, आप आने वाली समस्याओं के समाधान में मदद कर सकते हैं, जैसे कि अवस्थात्मक निर्माण, पर्यावरणीय धारा और विपणन आदि।

  3. स्कोरिंग की संभावना: विषय की मजबूत नींव के साथ, अभ्यर्थी अक्सर सिविल इंजीनियरिंग को एक स्कोरिंग वैकल्पिक मानते हैं।

  4. करियर संरेखण: सिविल इंजीनियरिंग विषय का चयन करना आपकी शैक्षिक पृष्ठभूमि को सार्वजनिक प्रशासन, शहरी नियोजन या बुनियादी ढांचे विकसित करने के संभावित करियर पथों के साथ मेल खाता है।

upsc civil engineering optional syllabus को समझना

UPSC के लिए सिविल इंजीनियरिंग वैकल्पिक पाठ्यक्रम बहुत व्यापक होता है, जो विभिन्न विषयों का व्यापक क्षेत्र कवर करता है। इसमें दो पेपर होते हैं:

पेपर 1:

  1. संरचनात्मक विश्लेषण
  2. सॉलिड मैकेनिक्स
  3. निर्माण सामग्री और प्रबंधन
  4. फ्लूइड मैकेनिक्स और हाइड्रोलिक्स
  5. पर्यावरण इंजीनियरिंग
  6. भूसंगणन इंजीनियरिंग

पेपर 2:

  1. सर्वेक्षण
  2. परिवहन इंजीनियरिंग
  3. भूगोलीय सूचना प्रणाली (GIS) और दूरसंवेदन
  4. परियोजना प्रबंधन और अनुमान लगाना
  5. इमारत निर्माण और रखरखाव इंजीनियरिंग

तैयारी रणनीतियाँ(Preparation Strategies) :

मानक पाठ्यपुस्तकें: आर.के. द्वारा लिखित “सामग्री की ताकत” जैसी मानक पाठ्यपुस्तकों से शुरुआत करें। बंसल, गर्ग और एस.के. द्वारा “पर्यावरण इंजीनियरिंग”। गर्ग, और खन्ना और जस्टो द्वारा “परिवहन इंजीनियरिंग”।

पिछले वर्ष के प्रश्नपत्र: परीक्षा पैटर्न और पूछे गए प्रश्नों के प्रकार को समझने के लिए पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करें।

नियमित अभ्यास करें: विषय की गणितीय और वैचारिक प्रकृति को देखते हुए, नियमित अभ्यास महत्वपूर्ण है। संख्यात्मक समस्याओं को हल करें और वैचारिक समझ पर काम करें।

करेंट अफेयर्स एकीकरण: विषय की समग्र समझ विकसित करने के लिए सिविल इंजीनियरिंग अवधारणाओं को करंट अफेयर्स से जोड़ें।

मॉक टेस्ट: परीक्षा की स्थितियों का अनुकरण करने और अपनी तैयारी के स्तर का मूल्यांकन करने के लिए मॉक टेस्ट लें।

upsc civil engineering optional syllabus books in hindi medium

यहाँ कुछ सुझावित पुस्तकें हैं जो UPSC के सिविल इंजीनियरिंग वैकल्पिक पाठ्यक्रम के लिए हिंदी माध्यम में उपलब्ध हो सकती हैं:

पेपर 1:

  1. “संरचनात्मक विश्लेषण” – राममुर्ति और स्वामिनाथन
  2. “सॉलिड मैकेनिक्स” – भारतीय प्रकाशन
  3. “निर्माण सामग्री और प्रबंधन” – अमित गोस्वामी
  4. “फ्लूइड मैकेनिक्स और हाइड्रोलिक्स” – जे.पी. गुप्ता
  5. “पर्यावरण इंजीनियरिंग” – बी.एस. गुप्ता
  6. “भूसंगणन इंजीनियरिंग” – नंदकिशोर और जगदीश लाल

पेपर 2:

  1. “सर्वेक्षण” – आचार्य बलकृष्ण और राधेश्याम
  2. “परिवहन इंजीनियरिंग” – संजय शर्मा
  3. “भूगोलीय सूचना प्रणाली (GIS) और दूरसंवेदन” – राजीव भुषण
  4. “परियोजना प्रबंधन और अनुमान लगाना” – विनोद खन्ना
  5. “इमारत निर्माण और रखरखाव इंजीनियरिंग” – सुदर्शन चान्दील

ये पुस्तकें UPSC के सिविल इंजीनियरिंग वैकल्पिक पाठ्यक्रम के विभिन्न विषयों को कवर करती हैं और परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी हो सकती हैं। पूर्व वर्षों के प्रश्न पत्रों को हल करके और अभ्यास परीक्षण करके अपने अध्ययन को मजबूत करने का प्रयास करें।

upsc civil engineering optional syllabus books in English medium

Certainly! Here are some recommended books for UPSC Civil Engineering Optional in English:

Paper 1:

  1. “Structural Analysis” by R.C. Hibbeler
  2. “Mechanics of Materials” by Ferdinand P. Beer & E. Russell Johnston Jr.
  3. “Construction Materials, Methods, and Techniques” by William P. Spence
  4. “Fluid Mechanics” by Frank M. White
  5. “Environmental Engineering: Water, Wastewater, Soil, and Groundwater Treatment and Remediation” by Nelson L. Nemerow and Franklin J. Agardy
  6. “Principles of Geotechnical Engineering” by Braja M. Das

Paper 2:

  1. “Surveying: Theory and Practice” by James M. Anderson
  2. “Transportation Engineering: An Introduction” by C.J. Khisty and B.K. Lall
  3. “Geographic Information Systems and Science” by Paul A. Longley, Michael F. Goodchild, David J. Maguire, and David W. Rhind
  4. “Project Management for Engineering, Business and Technology” by John M. Nicholas and Herman Steyn
  5. “Building Construction Illustrated” by Francis D.K. Ching

These books cover various subjects mentioned in the UPSC Civil Engineering Optional syllabus for both Paper 1 and Paper 2. They provide in-depth knowledge required for exam preparation. Don’t forget to supplement your studies with previous years’ question papers and practice tests to enhance your preparation.

निष्कर्ष(Conclusion):

UPSC के लिए अपना वैकल्पिक विषय सिविल इंजीनियरिंग चुनना एक योजनात्मक और योग्य निर्णय हो सकता है। यह न केवल आपकी शैक्षिक पृष्ठभूमि का लाभ उठाता है, बल्कि यह आपकी तैयारी को वास्तविक समस्या समाधान और समकालीन मुद्दों से जोड़ता है। सही दृष्टिकोण और समर्पण के साथ, आप पाठ्यक्रम में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। UPSC की यात्रा पर शुभकामनाएं!

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